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Date: 18th December 2024

कड़ाके की सर्दी से जनजीवन अस्त-व्यस्त:
दिसंबर 2024 की शुरुआत में उत्तरी भारत में कड़ाके की सर्दी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। उत्तरी राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, और दिल्ली में तापमान बर्फबारी और शीतलहर के कारण 3-4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जिससे ठंड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 200 से अधिक हो गई है।

शीतलहर के कारण सड़कों पर चलने में भी परेशानी हो रही है, और घने कोहरे ने रेल और सड़क यातायात को भी प्रभावित किया है। एयरपोर्ट्स और रेलवे स्टेशनों पर कई उड़ानें और ट्रेनें देरी से चल रही हैं, जिससे यात्रियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सर्दी हर साल बढ़ती जा रही है, और इस बार तो यह तापमान पिछले 20 वर्षों में सबसे कम दर्ज किया गया है।

ठंड से जूझते लोग:
सर्दी से सबसे अधिक प्रभावित गरीब और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोग हो रहे हैं। हालांकि, प्रशासन ने राहत कार्यों के तहत आश्रय स्थलों की व्यवस्था की है, लेकिन पर्याप्त संख्या में कंबल, गर्म कपड़े और अन्य राहत सामग्री की कमी हो रही है। कई लोगों ने अपनी जान गंवाई है, और यह घटना एक बार फिर से यह सवाल खड़ा करती है कि क्या प्रशासन सर्दी से बचने के लिए पर्याप्त उपाय कर रहा है।

इसके अलावा, बच्चों और बुजुर्गों को सर्दी से बचाने के लिए खास ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि इन समूहों पर शीतलहर का अधिक असर होता है। डॉक्टरों ने लोगों से घरों में ही रहने की अपील की है और गर्म कपड़े पहनने, आग जलाने और गर्म खाना खाने की सलाह दी है।

भविष्य में बेहतर तैयारी की आवश्यकता:
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि उत्तर भारत में सर्दियों के मौसम के लिए सरकार और प्रशासन को अधिक ठोस योजना तैयार करने की आवश्यकता है। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में शीतलहर से बचाव के लिए ठोस उपायों की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं में कमी लाई जा सके।

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